कभी खुशी कभी ग़म
किसी की हिस्से में खुशी किसी के हिस्से ग़म कोई प्यार में डूब तैर रहा कोई धोखे से बे हाल जी रहा। ~लता तेजेश्वर~
रोज़ रोज़ समाज में हो रहे औरतों और बच्चों पर अत्याचार से तंग आ कर, मन में जन्मे कुछ भावों को अपने कलम से उतारने कि कोशिश में एक नयी समाज कि आकांक्षा करते हुए ...latatejeswar 'renuka'