नवदुर्गा

नव दुर्गा नव लक्ष्मी तुम
गृहलक्ष्मी और महाकाली तुम
तुम जगत जननी, तुम गृह स्वामिनी 
तुम अन्नपूर्णा और काली तुम
तुम रक्षा कर्ता, तुम सहचरी
सहधर्मिणी भी तुम।

आदि से अंत तक तुम ही तुम
फिर क्यों हथियार छोड़
बन जाती हो अबला भी तुम
भूल जाती हो कि माँ हो तुम
नारी अबला नहीं नारी सबला है 
प्रमाण कर रक्षा खुद की करो
बच्चियों के पावन जीवन की
आन मान शान बनो तुम।

माँ धरती हो तुम
गृहलक्ष्मी हो तुम
न भूलो कि नवदुर्गा भी तुम
शस्त्र तुम्हारी हाथ में सदा
रक्षा के खातिर फिर उठालो अब
कि कोई बच्ची अब आहत न होगी
कोई न होगी शिकार
नवदुर्गा और नारी भी तुम

©लता तेजेश्वर रेणुका

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