समुद्री उफान




समुद्री उफ़ान

उजली किरण और...................................हल्का सा अँधियारा
कम्बल में छुप कर देखूँ...............................,जहाँ जाए नज़ारा,
चिड़ियों की चहचहाट.............................और सूरज की किरणें
                 खेलते हुए बच्चे और सागर की लहरें।

नींद से जागे दुनियाँ............................चिड़ियों की चहकने से
पलकें लगे भारी.......................................शबनम की बूंदों से-
आँख मेरी बंद पर...........................अहसास करूँ में सृष्टि को
      धन्यबाद करने से न थकूँ इतने सून्दर प्रकृति को।

सुन्दर ये धरती............................................सुन्दर ये प्रकृति
सुन्दर ये दिन ..........................................और सुन्दर ये रातें,
जिस अंधकार में छुपी है..............................कई राज़ की बातें।
अचानक देखूं ..........................................बदल रही है प्रकृति-
सूरज बरसा रही है .....................................अग्नि की आहुति,
हवा में उठी लहरें.....................................सागर में उठी प्रवाल-
         किसीकी बस में न था कुछ सोचने का बवाल।

थम गई है जिंदगी......................................थम गई है प्रकृति-
समझ न आये क्या हो रहा..................... और क्या होने को है?
पल भर में उजड़ गई कई ज़िंदगियाँ-
                                  चीखें पुकार रह गई, रह गई सिसकियाँ,
देखते ही देखते दंग रहगई दुनिया-
                            सोचती रहगई में आँखों में लेकर कहानियाँ ।

सपना सा लगे .............................................क्या वह था सच-
पर जब उजड़ी दुनिया देखूँ,.....................देखूँ ये प्रलय का मंच।
        नन्हा सा एक दिया जल उठा, लिए गहरी साँस
        भगवान तो बैठा है, देते हुए जीवन का आस ।



 © लता तेजेश्वर
मेरी पुस्तक नयी कविताएँ   'मैं साक्षी यह धरती की' से ली गई एक कविता।'

Comments

Popular posts from this blog

ହେ ଜଗନ୍ନାଥ!

Someone Watching Me

नवदुर्गा