मुझे मेरा बचपन लौटा दो
मुझे मेरा बचपन लौटा दो
एक कहानी की तरह
सच्चाई लौटा दो।
मिट्टी की गुडिया बनाकर
जान आ गई है ,
उसकी जहाँ लौटा दो।
जब हम रूठ जाया करते थे,
तुम खूब मानाने आ जाते थे,
उन खुशियों को आज लौटा दो।
जो, उस परी की कहानी में
लौटा दो वो मासूमियत वो मुस्कुराहट …
वो सारे ख़ुशीयाँ वो सारे पल
जो आज टुकड़ों में बट गए हैं,
लौटा दो वो गुड्डे की हंसती हुई
आँखे जो आज तन्हाई
के घेरे में हमें ढूँढ रही हैं।
वो बारिश का पानी जहा,
भीगते हुए सारा जहां
लुटाया करते थे,
लौटा दो उन दिनों को,
जो आज भी किसी कोने से
रुक रुककर आवाज़ दे रहा है।
लौटा दो उस मिट्टी की घर
जो बड़े अरमान से सजाया करते थे,
लौटा दो उन सारे यादें जो
जामुन के पेड़ के नीचे
ख्वाबों में सजाया करते थे।
जो बड़े अरमान से सजाया करते थे,
लौटा दो उन सारे यादें जो
जामुन के पेड़ के नीचे
ख्वाबों में सजाया करते थे।
©लता तेज
on: Sun Sep 02 02:16:31 PDT 2012
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