अंत

लोग जीते तो हैं खंडों में
और इन खंडों को समेट कर
वक्त ही साथ निभाता है अंत तक।

© लता तेजेश्वर 'रेणुका'

Comments

Popular posts from this blog

ହେ ଜଗନ୍ନାଥ!

Someone Watching Me

नवदुर्गा