एक आलेख आरक्षण के नाम

दुःख हर किसी की अपनी जगह है, हर कोई लड़ता है मजबूरी से। सब को इससे निपटने का सिर्फ एक ही रास्ता दिखता है वह है आरक्षण। आरक्षण की बात हो तो पटेल समुदाय के बाद अब मराठों की बारी आ गयी, ऐसे में अगर हर कोई जात के बिना पर आरक्षण के लिए कदम उठाए तो खुले वर्ग के लिए या अच्छे नंबर लेकर पास होने वालों का कोई मायने ही नहीं रहेगा बल्कि उनके लिए श्राप हो जाएगा। मराठा, पटेल, एससी, एसटी और आगे भी कई जातें हैं सभी को आरक्षण चाहिए। अरे आरक्षण किसे नहीं चाहिए। मुझे भी चाहिए, ये तो आरक्षण क्या हुआ ये तो गणपति भगवान के हाथ का प्रसाद हो गया। प्रसाद हर किसी को चाहिए। अहिंदी भाषी हिंदी लेखिका हूँ, हिंदी की सेवा करती हूँ फिर आरक्षण तो बनता है। मुफ्त की रोटी तोड़ना हमें नहीं भाता। मेहनत करो और फायदा लेलो। आरक्षण तो उनका हक़ है जो मेहनत करने के बाद भी पेट भर खाना न खा सके।
आरक्षण ऐसा नहीं होना चाहिए की मुफ्त की रोटी बांटी जाए बल्कि कुछ काम दिया जाए और उसको उसी मेहनत की मिली रोटी मिले। वर्ना मुफ्त की रोटी तोड़ती तो अलसी हो जाऊंगी भाई। घर बैठे बैठे गैस पानी शिक्षा राशन आरक्षण से मिले तो फिर क्यों कोई काम करें।
अगर देना है आरक्षण तो उन्हें दो जिसे हाड़ तोड़ मेहनत के बाद भी पेट भर खाना नहीं मिलता, हाड़ तोड़ मेहनत करे तो खाना क्यों न मिले? इस वर्ग  में किसान आते हैं क्यों कि उनका नसीब मौसम से जुड़ा रहता है, ऐसे में किसान को आरक्षण लेने का पूरा हक़ है जो समाज का पेट भरने के लिए हर प्रयास करते हैं लेकिन मौसम की मार से जहां के तहां रह जाते हैं। आरक्षण उन्हें दो जो एसिड अटैक या अनौपचारिक व्यवस्था और मानसिक या शारीरिक रूप से पीड़ित है। उन्हें दो जिन्होंने जान पर खेल कर सीमा पर लड़कर हमारी सुरक्षा करते हैं और अपनी जान को देश के लिए न्योछावर कर देते हैं।
अरे चिल्लाते हो की सुरक्षा नहीं मिलती? आज पुलिस में सीटें खाली पड़ी हैं, शिक्षकों की कमी से विद्यालय जूझ रहा है, बच्चे चोरी कर परीक्षा पास होते हैं तो क्या नैतिकता बचगयी। उन गरीबों को जो स्लम में रहते हैं, कड़े नियमों से सुरक्षा के साथ शिक्षा दो और खड़े करदो हर गली में गार्ड बनाकर, उन गरीबों को काम भी मिलेगा और राशन भी। रिक्शा वालों को सीक्रेट एजेंसी में काम दिलवा दो जो हर गली घूमते हैं, तो देखो भक्षक भी रक्षक बन जाएंगे। स्लम में जीने वालों को आरक्षण के बदले कड़ी शिक्षा दिलवाओ। हर छोटे बस्ती में सरकारी स्कूल खोल दो हर बच्चा आयेगा पढ़ने। लोगों को मेहनत करने पर मजबूर करदो, लोगों को काम दे दो आरक्षण कोई नहीं मांगेगा। बल्कि अन्याय के खिलाफ लड़ना सीख जाएंगे। सब का आत्मविश्वास बढ़ जाएगा जब सब को काम मिलेगा। आरक्षण तो समाज का कुपोषण जैसा है, जो इसके प्रभाव में आते है, उनकी जिंदगी बनने से ज्यादा बिगड़ती है। आलस और कामचोरी इसका साइड इफ़ेक्ट है। सोचो और गौर करो, अगर कोई रास्ता निकले तो जरूर अपनाओ। जय हिंद।

©लता तेजेश्वर 'रेणुका'

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