नया साल2019

मेरा संदेश 2019 के लिए
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हे दिसम्बर तुम ऐसे आना
जैसे पाक मंदिर से आती है भगवान का नाम
ऐसे आना तुम जैसे खेतों से आती है भरी अनाज़ का ठेला
तुम आओ तो यूँ
भरे बदन में प्यार लाना
होशो आवाज़ खो चुकी है 
राजनेताओं की
कुछ तालिम और इंसानियत 
भर ले आना।
किसान की जिंदगी यूँ महके 
जैसे हरियाली हो बाग में
सूखे कंकर में फूटे
पानी की बौछार है
तुम आना दुल्हन सी
जगमगाती चेहरे लिए
सदा रहना सुहागन सी
भरी चूड़ियाँ और ग़ज़रों सी
ठाठ लिए आना तुम
राजाओं की महलों से
जहाँ प्रजाओं का होता था बोलबाला 
बिनकोई संका से
न जाओ फिर दुबारा 
फलो फूलो यूँ दिलों में
बसना भारत वासियों के सीने में 
जैसे दुल्हन छाप छोड़ती हाथों का 
ससुराल की दीवारों में
ऐसे आना तुम और महका जाना 2019 को
और सियासी के दलदल को 
ना भरना दिलों में
मैं और मेरी तनहाई
तुझसे बोलेंगे तब ही
जब खिलेगा पंक में कमल
और नदी होगी पावन गंगा सी।
लौटके आना बार बार
ऐसे दिशा देने तुम
देश को नहला कर बारिश में
पाक ममता भरना तुम
पाक ममता भरना तुम।
©लतातेजेश्वर 'रेणुका'
2018- दिसम्बर-12.02

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