ले आओ बचपन को फिर से

मुझे मेरी बचपन से मिला दो
दो प्यार भरा निवाला खिला दो
भूल गयी हूँ जो दास्तां पुरानी
वह सावन का झूला झुला दो।

ले आओ बचपन को या लौट चलें 

उन दिनों के बारिश के पानी में 

जहाँ कागज की नाव बहाते थे।

खो गयी हूँ बड़ों की दुनिया में
बचपन की यादों से बिछड़ कर
जिम्मेदारी के बोझ तले दब गयी हूँ

भूली हुई दास्ताँ फिर याद दिला दो
दो प्यार भरा निवाला खिला दो।

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